"संघर्ष के रास्ते" कविता।
चलकर नदी तो लांघना चाहता हूं|
अर्थात
विषम परिस्थितियों को
चुनौती देकर संघर्ष के रास्तों पर चलकर
जीवन के बहुमूल्य चीजों को प्राप्त करना चाहता हूं|
हर कष्टों को सह
जीवन में आई कठिनाइयों से
पुरजोर मुकाबला करना चाहता हूं|
रास्ते में आई
अनगिनत चुनौतियों से लड़कर
सफलता के उच्चतम शिखर पर जाना चाहता हूं|
पता है मुझे
कई विपत्तियां आएंगी
लोग कहेंगे
रुक जा आगे बहुत खतरा है
लेकिन
हमें संघर्ष पथ से
बिना डगमगाए संघर्ष के
रास्ते को नापना हैं और वहा तक के सफर को पूरा करना है|
मुझे विश्वास है
मैं उन विपत्तियों को
मैं उन कठिनाइयों को
दरकिनार कर इस कठिन रास्ते की दूरी को जरूर पूरा करूंगा|
~दिव्यांश~
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