क्या आपको पता है विश्व को सबसे पहले गणतंत्र का ज्ञान कराने वाले जगह का नाम?

आज 26 जनवरी है भला आप वैशाली जिला को कैसे भूल सकते है? बिहार राज्य का वैशाली। हां हां सही सुना आपने बिहार राज्य का वैशाली जिला। वही वैशाली जिला जो गणतंत्र की जननी और भगवान बुध की कर्मभूमि रही है।  वही वैशाली जहां भगवान बुद्ध ने वैशाली में अपना आखिरी प्रवचन भी दिया और यहां अपने निर्वाण की घोषणा की।

अतीत के पन्नों में दबे वैशाली का इतिहास कुछ दिलचस्प रहा है आइए उन पन्नों को पलटते है। ऐतिहासिक प्रमाणों की माने तो वैशाली के कई संदर्भ जैन धर्म और बौद्ध धर्म से संबंधित ग्रंथों में पाए जाते हैं। छठी शताब्दी ईसा पूर्व में  महान लच्छवी वंश ने वैशाली में शासन किया था, और साम्राज्य नेपाल की पहाड़ियों तक बढ़ाया था। लिक्चवी  को एशिया का पहला गणराज्य राज्य माना जाता है। 

गणराज्य का मूल अर्थ होता है 
वह शासन प्रणाली जिसमें प्रमुख सत्ता लोक या जनता अथवा उसके चुने हुए प्रतिनिधियों या अधिकारियों के हाथ में होती है । 

माना जाता है की मूलतः वैशाली को गणराज्य संरचना की देन मानी जाती है।  आज से 2500 साल पहले वैशाली गणराज्य में अपने गण्नायक को चुनने के लिए चुनाव होते थे जो छोटी छोटी समितियों के रूप में कार्य करती थी और वह जनता के लिए नियम और नीतियों को बनाते थे।

स्वतंत्रता संग्राम के समय वैशाली के शहीदों की अग्रणी भूमिका रही है। बसावन सिंह, बेचन शर्मा, अक्षयवट राय, सीताराम सिंह जैसे कई स्वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ाई में महत्त्वपूर्ण हिस्सा लिया था । आजादी की लड़ाई के दौरान 1920, 1925 तथा 1934 में महात्मा गाँधी का वैशाली जिले में तीन बार आगमन हुआ था।

हमारे यहां लोकतंत्र की परंपरा हजारों साल पुरानी रही है। आज विश्व के लोकतांत्रिक देशों में को उच्च सदन और निम्न सदन की प्रणाली है वह वैशाली गणराज्य से ही लिया गया है। वैशाली जिला की क्षेत्रीय भाषा वज्जिका है। विश्‍व को सर्वप्रथम गणतंत्र का ज्ञान करानेवाला स्‍थान वैशाली ही है।

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