भूगोल क्या है? भूगोल शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई? भूगोल के बारे में जानिए विस्तार से|

भूगोल (Geography) :- भूगोल दो ग्रीक शब्दों Geo + Graphia से बना है| Geo का समान्य अर्थ पृथ्वी से और Graphia का समान्य अर्थ अध्ययन से है| अर्थात भूगोल का समान्य अर्थ पृथ्वी का अध्ययन करना है|

भूगोल के इतिहास में दो प्रमुख भोगोलवत्ता हुए:-

1) हिकेटियस- हिकेटियस ने भूगोल शब्द का प्रथम बार प्रयोग किया | इन्होंने स्पष्ट किया कि भूगोल का मतलब पृथ्वी का अध्ययन करना है|

2) एरिटोस्थनिज - ने भूगोल की पहली रचना भूगोल की पहली पुस्तक Geographia में किया था| यह पहले ऐसे विद्वान थे जिन्होंने भूगोल को एक विषय के रूप में स्थापित किया|

(नोट - हिकेटियस और एरिटोस्थनिज को भूगोल के पिता के रूप में जाना जाता है| समान्य पुस्तकों में एरिटोस्थनिज को भूगोल के पिता के रूप में दर्शाया गया है|)

भूगोल का अध्ययन के रूप में विभाजन
1) भौतिक भूगोल/प्राकृतिक भूगोल - इसके अंतर्गत अध्ययन का केंद्र बिंदु प्राकृतिक तत्व है| पृथ्वी सतह पर उपस्थित प्राकृतिक तत्वों का अध्ययन करना ही भौतिक भूगोल है|

*भौतिक भूगोल/ प्राकृतिक भूगोल के अंतर्गत अध्ययन करते है
क) भू-आकृति विज्ञान - पृथ्वी की सतह पर बनी हुई विभिन्न स्थलाकृति का अध्ययन भू-आकृति विज्ञान कहलाता है|

ख) जलवायु विज्ञान :- पृथ्वी सतह पर मौजूद जल और वायु के विशेष अध्ययन को जलवायु विज्ञान कहते है| इसके अंतर्गत तापमान,वर्षा और वायुदाब का अध्ययन किया जाता है|

ग) समुद्र विज्ञान :-  पृथ्वी सतह पर मौजूद खारे पानी की उपस्थिति समुद्र,झील,सागर,महासागर आदि में है| इसके विशेष अध्ययन को समुद्र विज्ञान कहते है| 
इसमें अध्ययन किया जाता है:-
•जल प्रवाह कैसे होता है?
•जलधारा कैसे चलती है?
•ज्वारभाटा कैसे आता है?
•सागरीय जीवन कैसा है?

घ) जैव भूगोल:- पृथ्वी सतह पर मौजूद पादप और जंतु के जीवन के उपस्थिति के विशेष अध्ययन को जैव भूगोल कहते है| इसके अंतर्गत मृदा, वनस्पति और जंतु का अध्ययन किया जाता है|

2)मानव भूगोल:- इसमें अध्ययन का केंद्र बिंदु मानव है| मानव द्वारा किए गए विभिन्न क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है|

*मानव भूगोल के अंतर्गत की जाने वाली आर्थिक क्रियाएं
क) प्राथमिक क्रिया:- सीधा प्राकृतिक में मौजूद संसाधनों का उपभोग करता है| इसे लाल कॉलर श्रमिक के नाम से भी जाना जाता है|
जैसे - आखेट, भोजन संग्रह,पशुचारण,मछली पकड़ना,कृषि, खनन कार्य आदि|

ख) द्वितीयक क्रिया:- में प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ जाता है| प्रकृति में पाए जाने वाले कच्चे माल  का रूप बदलकर उसे मूल्यवान बना देती है| इसके अंतर्गत विनिर्माण जैसे कार्य किए जाते है| इसे नीला कॉलर श्रमिक के नाम से भी जाना जाता है|
उदाहरण:- लौह अयस्क से औजार बनाना ,कपास से तंतु बनाना आदि| 

ग) तृतीयक क्रिया:- इसे "सेवा क्षेत्रक" के नाम से भी जाना जाता है|इस तृतीयक क्रियाकलाप में उत्पादन और विनिमय दोनों सम्मलित है जिसका उपभोग किया जाता है| यहां उत्पादन कुशलता, अनुभव और ज्ञान पर आधारित होता है| उत्पादन को पारिश्रमिक और वेतन के रूप में मापा जाता है|  विनिमय के अंतर्गत व्यापार,परिवहन और संचार की सुविधाएं सम्मिलित है| इसे सफेद कॉलर श्रमिक के नाम से भी जाना जाता है|
जैसे:- बिजली मिस्त्री,धोबी, नाई,दुकानदार,शिक्षक आदि

घ) चतुर्थक क्रिया:- अनुसंधान और विकास पर केंद्रित होते है| इसके अंतर्गत सूचनाओं का संग्रहण,उत्पादन और प्रकीर्णन अथवा सूचना का उत्पादन सम्मिलित है| विकसित अर्थव्यवस्था में आधे से अधिक कर्मी इस क्षेत्र में कार्यरत है| प्रबंधक,परामर्शदाता, विश्वविद्यालय अध्यापन, सॉफ्टवेयर सुविधाएं आदि इस क्रिया के अंतर्गत आती है|

ङ)पंचम क्रिया: इस क्रियाकलाप में उच्चतम स्तर के निर्णय लेने तथा नीतियों का निर्माण करने वाले कार्य सम्मिलित है| इसे प्रायः स्वर्ण कॉलर के नाम से जाना जाता है| यह तृतीयक क्रिया का एक और उप विभाग है|

द्वेतवाद :- भौतिक भूगोल और मानव भूगोल के जन्म से भूगोल में द्वेतवाद का जन्म हुआ है|द्वेतवाद एक ऐसा सिद्धांत है जब एक ही समय में दो विचारधारा का जन्म हो|




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