अपनी गलतियों पर पछतावा करने से अच्छा है उससे आप कुछ सीखें......

अपनी गलतियों पर पछतावा करने से अच्छा है उन गलतियों से आप कुछ सीखें......
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जब तक इंसान को लात नहीं पड़ती है अर्थात् जब तक इंसान ठोकरे खाकर अपने पैर नहीं घिस लेता है तब तक इंसान को अक्ल और समझ नहीं आती है. आपके जिंदगी में गोल निर्धारित होने चाहिए ताकि आप कहीं भटक न सकें. मेरे life की सबसे बड़ी भूल यही रही है कि कभी गोल Fix ही नहीं रहा है.

असल में मेरी कहानी की शुरू 6वीं कक्षा में नवोदय विद्यालय में Admission लेने से होती है. जिंदगी में कैरियर संबधी कई ऐसे निर्णय हमने लिए जो कई बार मेरे लिए लाभकारी भी सिद्ध हुआ है और नुकसानदेह भी. 10वीं बोर्ड परीक्षा देकर घर आ चुके थे. अब मेरा प्लान हुआ मैं IIT JEE की तैयारी करूंगा. आईआईटी जेईई की तैयार हमने शुरू कर दी फिर 10वीं के रिजल्ट आए और रिजल्ट के 10 दिनों बाद हमने अपने इस निर्णय को बदल लिया और वापस नवोदय विद्यालय में ही Humanities में ऐडमिशन ले लिया. 

वहां 12वीं तक में आते आते हमारे अंदर civil services का भूत उतर कर पत्रकारिता का भूत सवार हो चुका था और पत्रकारिता संबधी विषय में एडमिशन लेने का ठान लिया था। फिर क्या फिर से निर्णय बदल लिए और राजनीति विज्ञान विषय से पटना विश्वविद्यालय के पटना कॉलेज में एडमिशन ले लिया.

पटना कॉलेज में एडमिशन के कुछ दिनों बाद CUET का रिजल्ट घोषित हो चुका था. मुझे हिंदी विषय से दयाल सिंह कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय मिला था. उस दौरान हमने ठान लिया था कि मैं अभी स्नातक की पढ़ाई पटना कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय से ही पूरा करूंगा. फिर हमने अपना नामांकन ड्रॉप कर दिया और दिल्ली विश्वविद्यालय नहीं आने का निर्णय ले लिया.

पत्रकारिता में मेरी रुचि 11वीं कक्षा के मध्य में पूरी तरह से जाग उठी थी. इसके संदर्भ में कई लोगों से मैंने व्यक्तिगत तौर पर बात भी किया और इसके बारे में पूरी जानकारी इकट्ठी की थी. CUET परीक्षा परिणाम घोषित होने का बाद इस वक्त मैं बीच मंझधार में आ चुका था कुछ समझ नहीं आ रहा था कि दिल्ली विश्वविद्यालय में नामांकन लूं या नहीं लूं. 

दिल्ली विश्वविद्यालय में नामांकन प्रक्रिया मैने ड्रॉप कर दिया था. मेरे पास एक ऑप्शन था कि स्पॉट राउंड में मैं फिर से दिल्ली विश्वविद्यालय के नामांकन प्रक्रिया में शामिल हो सकता हूं. कई सीनियर व बड़े भाई के सुझावों ने मुझे फिर से दिल्ली विश्वविद्यालय तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया और मैंने अपने पसंदीदा विषय हिंदी पत्रकारिता से स्पॉट राउंड में नामांकन लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक की पढ़ाई कर रहा हूं.

निष्कर्ष:- अपने जिंदगी में अपने लक्ष्य को निर्धारित कर के चले. कई बार आपके द्वारा लिए गए तुरंत के निर्णय आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है तो कई बार आपके कैरियर को दांव पर भी लगा सकती है. इसलिए अपने कैरियर निर्माण संबंधी निर्णय बहुत ही सोच समझकर और ठंडे दिमाग से ले. अपने द्वारा किए गए गलतियों पर पछतावा करने के बजाय उसपर मंथन करें और सुधार कर आगे की रणनीति को तय करें कि आगे क्या करना है?

    दिव्यांश गांधी
दिल्ली विश्वविद्यालय
पूर्व छात्र पटना विश्वविद्यालय
पूर्व छात्र नवोदय विद्यालय 
26 अप्रैल 2023

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